गरियाबंद/मैनपुर@TAKKAR न्यूज :- देश को आजाद हुए 79 साल हो चुके हैं। हम 'डिजिटल इंडिया' और चांद-मंगल तक पहुंचने की बात कर रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था पर कड़ा सवाल खड़े करती है। जिले के मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत राजापड़ाव क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखा है।

ग्रामीणों की मांग सिर्फ इतनी है कि उनके अंधेरे गांवों में भी विकास का उजाला पहुंचे।

ग्राम अड़गड़ी में उमड़ा ग्रामीणों का हुजूम

सिस्टम और प्रशासन से हार मान चुके राजापड़ाव क्षेत्र के हजारों ग्रामीण ग्राम अड़गड़ी में इकट्ठा हुए। इस बड़ी बैठक में लोगों का गुस्सा और निराशा साफ नजर आ रही थी। ग्रामीणों ने एक सुर में अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि उनके कई पारा और टोले आज भी ढिबरी और लालटेन युग में जीने को मजबूर हैं। कई बार आवेदन देने, दफ्तरों के चक्कर काटने और आंदोलन करने के बाद भी जब किसी ने नहीं सुनी, तो मजबूरन उन्हें खून से खत लिखकर पीएम मोदी से न्याय की गुहार लगानी पड़ी।

टाइगर रिजर्व और NOC बना सबसे बड़ा रोड़ा

आखिर इतने सालों बाद भी यहां बिजली क्यों नहीं पहुंची? इसका मुख्य कारण वन विभाग के नियम हैं। यह पूरा इलाका उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के दायरे में आता है। वन विभाग के कड़े नियमों और एनओसी न मिल पाने के कारण इस क्षेत्र में विद्युतीकरण का काम सालों से अटका पड़ा है। विभागीय पेंच के बीच यहां की भोली-भाली जनता पिस रही है।

गूंजा नारा- "जल-जंगल-जमीन हमारा है"

बैठक के दौरान ग्रामीणों का आक्रोश जमकर फूटा। सभा में "जल-जंगल-जमीन हमारा है, बिजली-पानी अधिकार हमारा है" के जोरदार नारे लगाए गए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अगर वे इस जंगल के रहवासी हैं, तो यहां की मूलभूत सुविधाओं पर भी उनका पहला हक है।

अब दिल्ली से है आखिरी उम्मीद

स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से निराश हो चुके इन आदिवासियों और ग्रामीणों की आखिरी उम्मीद अब देश के प्रधानमंत्री हैं। अब देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि गरियाबंद के बीहड़ों से खून से लिखी यह मार्मिक पुकार दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक पहुंच पाती है या नहीं? क्या प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद राजापड़ाव क्षेत्र के इन अंधेरे घरों में कभी रोशन का सवेरा होगा?