रायगढ़@TAKKAR न्यूज :- कला, संगीत और शास्त्रीय साधना की अंतरराष्ट्रीय धरोहर के रूप में विख्यात रायगढ़ का ऐतिहासिक चक्रधर समारोह इस बार कला के उच्च मानदंडों के बजाय गहरे विवादों के दलदल में धंस गया है। रामलीला मैदान में सजे 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह के सातवें दिन एक ऐसा सांस्कृतिक पतन देखने को मिला, जिसने इस प्रतिष्ठित मंच की सदियों पुरानी मर्यादा को झकझोर कर रख दिया है। पद्मश्री से अलंकृत विभूतियों और शास्त्रीय साधकों की तपस्या स्थली माने जाने वाले इस मंच से जब 'बीड़ी जलाई ले' और 'जुम्मा चुम्मा दे दे' जैसे द्विअर्थी और फूहड़ फिल्मी गानों की तान छेड़ी गई, तो कला रसिकों का सिर शर्म से झुक गया। शास्त्रीय सुरों और कथक के घुंघरुओं की झंकार के लिए पहचाने जाने वाले इस आयोजन में इस कदर सतही प्रस्तुति पर अब सियासी और सामाजिक पारा पूरी तरह चढ़ चुका है।

सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह का तीखा प्रहार, सीएम साय से शिकायत की तैयारी

समारोह के सातवें दिन कथक की गरिमामय प्रस्तुतियों के ठीक बाद मंच पर पहुंचे इंडियन आइडल फेम अमित साना और उनके दल ने जैसे ही इन गानों की प्रस्तुति शुरू की, सभा में मौजूद गणमान्य लोग स्तब्ध रह गए। मंच के ठीक सामने जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी अपने परिवारों के साथ बैठे थे, लेकिन इस फूहड़ता को रोकने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। सांसद ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि यह कृत्य न केवल संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह जी की पावन स्मृति और उनकी आत्मा को गहरी ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक अस्मिता का खुला अपमान है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस अक्षम्य लापरवाही और आयोजन समिति के गिरते स्तर को लेकर वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश के संस्कृति मंत्री से मिलकर न केवल लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे, बल्कि इस मामले को बेहद आक्रामकता से उठाएंगे।

शुरुआत से ही अव्यवस्था और प्रोटोकॉल उल्लंघन की भेंट चढ़ा 41वां समारोह

विवादों की यह आग केवल सातवें दिन के गानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 41वें चक्रधर समारोह की नींव ही गंभीर प्रशासनिक चूकों और प्रोटोकॉल के उल्लंघनों पर टिकी नजर आ रही है। समारोह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के पहुंचने से पहले ही आनन-फानन में गणेश वंदना कराकर कार्यक्रम की शुरुआत कर दी गई, जो सीधे तौर पर स्थापित प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने जैसा था। हद तो तब हो गई जब परंपराओं को ताक पर रखकर प्रतिदिन चार-चार कार्यक्रमों के संपन्न हो जाने के बाद दीप प्रज्वलन की औपचारिकता निभाई जाती रही। रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना गुरु सोमा दास के निर्देशन में श्री नटराज नृत्य कला केंद्र के कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से जिस शास्त्रीय गरिमा को स्थापित किया था, उसे अमित साना के इस फूहड़ गायन ने पल भर में मटियामेट कर दिया।

सोशल मीडिया पर फूटा कला प्रेमियों का आक्रोश, प्रशासन की जमकर खिंचाई

शास्त्रीय मंच पर परोसी गई इस भौंडी प्रस्तुति के बाद सोशल मीडिया पर कला प्रेमियों का गुस्सा लावा बनकर फूट पड़ा है। फेसबुक से लेकर एक्स तक लोग जिला प्रशासन और आयोजकों की समझ पर तीखे तंज कस रहे हैं। कला प्रेमियों का कहना है कि जिस मंच पर कभी देश-विदेश के दिग्गज उस्ताद और पंडित अपनी कला समर्पित करने को जीवन का सौभाग्य मानते थे, उस मंच को प्रशासन ने गली-मोहल्ले के सस्ते आर्केस्ट्रा में तब्दील कर दिया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स व्यंग्य कर रहे हैं कि शास्त्रीय संगीत के नाम पर जनता को क्या परोसा जा रहा है और क्या रायगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अब 'बीड़ी जलाई ले' के धुएं में ही खोकर रह जाएगी। ऐतिहासिक विरासत से किए गए इस गंभीर समझौते के बाद अब देखना यह होगा कि संस्कृति विभाग और राज्य सरकार इस पर क्या कड़ा कदम उठाती है।